गुरुवार, 26 अक्टूबर 2017

मेरे आँखों में समंदर...

मेरे आँखों में समंदर

मेरे दिल में तूफान है

मेरी हर कोशिश में जान

मेरी हर ख़्वाहिश में ईमान है

कल उन शिखरों पर मैं भी रहूँगा

भले ये दुनिया आज मुझसे अंजान है

क्योंकि मुझे टूट के भी जो टूटने नहीं देता

 मेरे साथ वही तो मेरा भगवान है


                                ---राजकांत

रविवार, 22 अक्टूबर 2017

स्वच्छ रहो स्वस्थ्य रहो

 स्वच्छ  रहो   स्वस्थ्य  रहो



स्वच्छ   रहो    स्वस्थ्य   रहो
सुंदर और सरल ये काम करो
खुद   पे  तुम  फ़ख्र   करो
इस भारतभूमि को स्वर्ग करो


कूड़ा- कचड़ा  फेकों  न तुम यहाँ - वहाँ
गंदगी  मत  फैलाओ  तुम  जहाँ -तहाँ
प्रदूषण  है  हम  पे  अभिशाप  बड़ा 
सब  खुल  के  इसका  प्रतिकार  करो 


गली -गली  और  सड़क -सड़क 
गाँव -गाँव   और   शहर -शहर 
जहाँ -जहाँ जाये तेरी - मेरी सबकी  नज़र 
मिलके भाई-भाई सब साफ़ -सफ़ाई करो 


आओ गाँधी जी  का   सपना साकार करें 
कुछ भी  नहीं है मुश्किल जो हम ठान लें 
सब मिलके स्वच्छ भारत का निर्माण करो
सबसे पहले स्वंय पे  ये  उपकार करो  


                                                         ---  राजकांत ' क्रांति '