गज़ल
मंदिरों और मस्जिदों की उलझनों में ,न उलझो दोस्तों!
उलझनेंऔर भी हैं कई,कभी उनको भी तो सुलझाओ दोस्तों!
जगमगा रहे, झिलमिला रहे, लग रहे प्यारे-प्यारे सारे नज़ारे!
गौर से देखो, हक़ीक़त है क्या, आँखों से रंगीन चश्मा उताड़ो दोस्तों!
खाने को रोटी नही,पीने को पानी नहीं,जीने का हक़
सबको मिला नहीं!
और करते हो आसमान की बातें,पाँव ज़मीं पे बिन टिकाये दोस्तों!
फर्क करते देखा नहीं कभी,हवा,बारिष,रोशनी और चाँदनी को!
एक-सा बनाया गया है हमसब को, तो आओ हर फर्क को मिटा दो दोस्तों!
तोड़ दो जाँत-पाँत,मिटा दो ऊँच-नीच को,मिला दो राम से रहीम को!
गले मिलके सारा दर्द बाँट लो,यहीं पे स्वर्ग और जन्नत बना लो दोस्तों!
---राजकांत
उलझनेंऔर भी हैं कई,कभी उनको भी तो सुलझाओ दोस्तों!
जगमगा रहे, झिलमिला रहे, लग रहे प्यारे-प्यारे सारे नज़ारे!
गौर से देखो, हक़ीक़त है क्या, आँखों से रंगीन चश्मा उताड़ो दोस्तों!
खाने को रोटी नही,पीने को पानी नहीं,जीने का हक़
सबको मिला नहीं!
और करते हो आसमान की बातें,पाँव ज़मीं पे बिन टिकाये दोस्तों!
फर्क करते देखा नहीं कभी,हवा,बारिष,रोशनी और चाँदनी को!
एक-सा बनाया गया है हमसब को, तो आओ हर फर्क को मिटा दो दोस्तों!
तोड़ दो जाँत-पाँत,मिटा दो ऊँच-नीच को,मिला दो राम से रहीम को!
गले मिलके सारा दर्द बाँट लो,यहीं पे स्वर्ग और जन्नत बना लो दोस्तों!
---राजकांत