होशियार ख़बरदार
हो जा रे हो जा तू तैयार
करना है हर जुल्म का फर्दाफास
इंक़लाब जिंदाबाद
जिंदाबाद-जिंदाबाद
इंक़लाब जिंदाबाद
मन-मन में शोला भड़कने दे
नस-नस में चिंगारी छिटकने दे
हर सर पे कफ़न बंधने दे
सरफरोशी की तमन्ना जगने दे
अब न सहेंगे अत्याचार
अब करंगे हम प्रहार
इंक़लाब जिंदाबाद
सरकार भ्रष्ट है जनता त्रस्त है
प्रजात्रंत ये अस्त -व्यस्त है
चलती है अफसरों की ललफितेशाही
मंत्री-संत्री मिल करते खूब कमाई
अब न सहेंगे अत्याचार
अब करंगे हम प्रहार
इंक़लाब जिंदाबाद
कभी बाढ़ कभी सूखा
कभी प्यासा कभी भूखा
कभी भाई-भाई का दंगा
कभी मंहगाई नाचे नाच नंगा
और इसपे भी होती राजनीति
हर नेता सेंके अपनी रोटी
अब न सहेंगे अत्याचार
अब करंगे हम प्रहार
इंक़लाब जिंदाबाद
राजकांत 'क्रांति '