गुरुवार, 12 सितंबर 2013

इंक़लाब जिंदाबाद

होशियार ख़बरदार 

हो जा रे हो जा तू तैयार 

करना है हर जुल्म का फर्दाफास 

इंक़लाब  जिंदाबाद 

जिंदाबाद-जिंदाबाद 

इंक़लाब जिंदाबाद 

 

मन-मन में शोला भड़कने दे 

नस-नस में चिंगारी छिटकने दे 

हर सर पे कफ़न बंधने दे 

 सरफरोशी की तमन्ना जगने  दे 

अब न सहेंगे अत्याचार 

अब करंगे हम प्रहार

इंक़लाब जिंदाबाद 

 

 

सरकार भ्रष्ट है जनता त्रस्त है 

प्रजात्रंत ये अस्त -व्यस्त है 

चलती है अफसरों की ललफितेशाही 

मंत्री-संत्री मिल करते खूब कमाई 

अब न सहेंगे अत्याचार

अब करंगे हम प्रहार

इंक़लाब जिंदाबाद

 

कभी बाढ़ कभी सूखा 

कभी प्यासा कभी भूखा 

कभी भाई-भाई का दंगा 

कभी मंहगाई नाचे नाच नंगा 

और इसपे  भी होती राजनीति 

हर नेता सेंके अपनी रोटी 

अब न सहेंगे अत्याचार

अब करंगे हम प्रहार

इंक़लाब जिंदाबाद






                                          राजकांत 'क्रांति '

 

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