न पक्ष न विपक्ष किसी का भी डर है
मेरी स्याही में है दम मेरी कलम निडर है
मैंने पढ़ा है Pen is mighter than the sword
So through my words ,I wanna change the world
तेरे -मेरे दुःख, दर्द ,संताप ,गम
बढ़ते ही जाते क्यों होते नहीं कम
कभी बाढ़ में बह जाते घर, खेत ,खलिहान
कभी सूखे की मार ,ले लेती है जान
रोज़गर नहीं ,शिक्षा नहीं, स्वास्थ्य का बेड़ा गर्क है
ओ ऊपरवाले क्यों पडता नहीं तुझको कोई फ़र्क है
राजभवन से ज़रा निकलो अपने अपने
सुन लो बेचारी जनता की हाहाकार
धिक्कार धिक्कार धिक्कार
तुझको धिक्कार मेरे सरकार
शहर शहर भटके हम दर बदर
न कोई इज़्जत न कोई क़दर
पीते अपमान का घूंट खाते गाली गलौज
घटती ये दुर्घटना संग हमारे रोज़ रोज़
अपने गांव अपने शहर अपने राज्य में
हमको काम दो हमको काम दो
रोटी कपड़ा और मकान दो
संविधान की मोटी किताब में, कहां है हमारा अधिकार ?
धिक्कार धिक्कार धिक्कार
तुझको धिक्कार मेरे सरकार
राजकांत