आंते बिलबिलाती है
उदर ज्वालामुखी-सी होती है
सर में आग होता है
आँखों में पानी
दिल में हूक उठती है
जब भूख लगाती है
उपदेश भाते नहीं है
नसीहत अच्छे नहीं लगते
मन करता है विद्रोह बार-बार
अन्न का दाना माँगता है तत्काल
धर्म की बातें कोरी लगती है
जब भूख लगती है
---राजकांत 'क्रांति'
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें