उड़ जा -उड़ जा
स्वप्न नए-नए नयनों में सजाये
उड़ जा रे पंछी पंख पसारे
अथाह अनंत आकाश
खुली दिशाएँ फैला चहुँ ओर प्रकाश
बड़ा अमूल्य तू ने पाया यौवन
आएगा न बार-बार फिर ये मौसम
छोड़ घोंसला नाप ले गगन
उड़ना ही कर्म तेरा हो जा इसमें मगन
कर ले पूरा अपना हर स्वप्न
माना निष्ठुर है संसार
पग-पग प्राणों का भय अपार
पर कर्म बिन जीवन कैसा
हर मुश्किलों में डटकर
हर संकटों से लड़कर
सपनों को साकार करना ही पड़ेगा
पाया है पंख तो उड़ना ही पड़ेगा
उड़ जा -उड़ जा
स्वप्न नए-नए नयनों में सजाये
उड़ जा रे पंछी पंख पसारे




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