स्वच्छ रहो स्वस्थ्य रहो
स्वच्छ रहो स्वस्थ्य रहो
सुंदर और सरल ये काम करो
खुद पे तुम फ़ख्र करो
इस भारतभूमि को स्वर्ग करो
कूड़ा- कचड़ा फेकों न तुम यहाँ - वहाँ
गंदगी मत फैलाओ तुम जहाँ -तहाँ
प्रदूषण है हम पे अभिशाप बड़ा
सब खुल के इसका प्रतिकार करो
गली -गली और सड़क -सड़क
गाँव -गाँव और शहर -शहर
जहाँ -जहाँ जाये तेरी - मेरी सबकी नज़र
मिलके भाई-भाई सब साफ़ -सफ़ाई करो
आओ गाँधी जी का सपना साकार करें
कुछ भी नहीं है मुश्किल जो हम ठान लें
सब मिलके स्वच्छ भारत का निर्माण करो
सबसे पहले स्वंय पे ये उपकार करो
--- राजकांत ' क्रांति '
Nice poem
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