गज़ल
मुझे मेरे दर्दों से निज़ात दिला सकता है कौन
मुझको मुझसे बेहतर दुनिया में समझ सकता है कौन
जिसे भी देखता हूँ कुछ उम्मीद भरी नज़रों से
वही है पुछता तेरा मेरा रिश्ता है क्या तू है कौन
नज़र मिलने से भी पहले नज़र चुरा लेते हैं कुछ लोग
ग़म के कुहासों में अरे छोड़ो नज़र आता है कौन
टूटे हुए को ही तोड़ना है दुनिया का रस्म-ओ-रिवाज़
बुरे वक़्त में सब मुहँ फेर लेते हैं पुछता है कौन
ऐ दिल तू खुद का ही सहारा बन खुद पर कर यकीं
तेरी मदद तेरे सिवा और दूसरा कर सकता है कौन
---राजकांत
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