बुधवार, 24 जनवरी 2018


                               गज़ल


मुझे मेरे दर्दों से निज़ात दिला सकता है कौन

मुझको मुझसे बेहतर दुनिया में समझ सकता है कौन


जिसे भी देखता हूँ कुछ उम्मीद भरी नज़रों से

वही है पुछता तेरा मेरा रिश्ता है क्या तू है कौन


नज़र मिलने से भी पहले नज़र चुरा लेते हैं कुछ लोग

ग़म के कुहासों में अरे छोड़ो नज़र आता है कौन


टूटे हुए को ही तोड़ना है दुनिया का रस्म-ओ-रिवाज़

बुरे वक़्त में सब मुहँ फेर लेते हैं पुछता है कौन


ऐ दिल तू खुद का ही सहारा बन खुद पर कर यकीं

तेरी मदद तेरे सिवा और दूसरा कर सकता है कौन



                                                   ---राजकांत


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