जब-जब मृत्यु का महासंगीत बजेगा
मैं तब-तब जीवन का महागान सुनाऊँगा
दशों दिशओं में जब भय व्याप्त हो जायेगा
धरती से अम्बर तक गहन अंधकार छा जायेगा
सब विनिष्ट और विध्वंश करने को
जब काल प्रबल हो जायेगा
मैं नवजीवन के नवनिर्माण का नवराग गाऊँगा
जब-जब मृत्यु का महासंगीत बजेगा
मैं तब-तब जीवन का महागान सुनाऊँगा
अन्याय को मिलेगा जब खुला समर्थन
जब होगा चारों ओर हिंसा का तांडव नर्तन
असत्य का उत्थान सत्य का पतन
हाहाकार करेगा जब हर व्यथित मन
मैं मन-मन में नया आश जगाउँगा
जब-जब मृत्यु का महासंगीत बजेगा
मैं तब-तब जीवन का महागान सुनाऊँगा
जब तक न राजनीति होगी निर्विकार
अंतिम नागरिक को न मिलेगा पूर्ण अधिकार
समाप्त न होगा सत्ता का घोर अपराध
स्वाहा न होगा जब तक भ्रष्टाचार
मैं तब-तब बारंबार यही प्रश्न उछालूँगा
जब-जब मृत्यु का महासंगीत बजेगा
मैं तब-तब जीवन का महागान सुनाऊँगा
---राजकांत
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