लाल -लाल बाल अरुण
उद्याचल से उतड़
होके प्रकाश रथ पे सवार
धीरे -धीरे हो चला तेज़ तरुण
पवन ने गाया स्वागत -गान
पुष्पों ने दिया सौरभ -सम्मान
चचहाते पंछियों ने किया वंदन
झूम-झूम पेड़ -पौधों ने किया अभिनंदन
जग-मग जग-मग सारे जग को
तिमिर नाश कर सारे भुवन को
सात रंग के रेशमी किरणों से
आलोकित कर दिया हर मन को
काली रजनी से भयभीत दुख़ी
हर चेहरे पर अब हँसी -ख़ुशी
जय-जय कार करते हैं सभी
जय हो दिनकर दीनानाथ रवि
---क्रांति
उद्याचल से उतड़
होके प्रकाश रथ पे सवार
धीरे -धीरे हो चला तेज़ तरुण
पवन ने गाया स्वागत -गान
पुष्पों ने दिया सौरभ -सम्मान
चचहाते पंछियों ने किया वंदन
झूम-झूम पेड़ -पौधों ने किया अभिनंदन
जग-मग जग-मग सारे जग को
तिमिर नाश कर सारे भुवन को
सात रंग के रेशमी किरणों से
आलोकित कर दिया हर मन को
काली रजनी से भयभीत दुख़ी
हर चेहरे पर अब हँसी -ख़ुशी
जय-जय कार करते हैं सभी
जय हो दिनकर दीनानाथ रवि
---क्रांति

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