ठेलेवाला मैं ठेलेवाला
दुनिया का बोझा ढ़ोता हूँ
जी-जान से श्रम करता हूँ
पर पैर किसी के न पड़ता हूँ
सर्दी-गर्मी हो चाहे बरसात
छुट्टी हो या कोई पर्व त्योहार
सर से लेके तलवे तक
बहता रहता पसीने की धार
आधा पेट तो भर पेट कभी
भाग्य से लड़कर झगड़कर
संग नमक हरी मिर्च
सुखी रोटी खा ही लेता हूँ
घोड़े बेच चादर तान के सोता हूँ
चोर लुटेरों से मैं नहीं डरता हूँ
ईर्ष्या नहीं मन में,सबकी खैर मनाता हूँ
मैं दीन दिनकर से पहले उठ जाता हूँ
नज़र उठा सीना तान के चलता हूँ
घमंड नहीं मेहनत पर गर्व करता हूँ
खून-पसीने की कमाई खाता हूँ
दुःख सहकर भी मस्त रहता हूँ
---राजकांत 'क्रांति'

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