उपजाऊ माटी बने
फलता पेड़ बने
बहता पानी बने
गीत मेरे
सर्दी की धूप बने
गर्मी की ठंडी पवन बने
सूखे की बारिश बने
भूखे की रोटी बने
गीत मेरे
सत्य का अन्वेषी बने
झूठ का द्वेषी बने
अहं को चूर करे
दुख को दूर करे
गीत मेरे
दीन का साथी बने
निर्बल का बल बने
सबल की जीत बने
मन में आनंद भरे
गीत मेरे

---राजकांत 'क्रांति'

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