शनिवार, 21 जनवरी 2012

त्रस्त है जनता

त्रस्त है जनता
पस्त है जनता
पुकार गरीब की कौन है सुनता ?

मंगहाई बन महामारी बढ़ी जा रही है
सुरसा की तरह मुँह बाए जा रही है
गरीबों को निगल कर ही ये लेगी दम
सरकार बस वादे पर  वादे किये जा रही है

विकास का लाभ
विकसित ही उठाए जा रहे हैं
अमीर  और अमीर
गरीब और गरीब हुए जा रहे हैं

नए नए उद्योग लगाये जा रहे हैं
किसान आत्महत्या किये जा रहे हैं
कुबेरों की संख्या बढ़ी जा रही हैं
आमजन भूख और बेरोजगारी संग जिए जा रही हैं

नीचेवाला बेहाल है ,बदहाल है
बस उपरवाला मालामाल है
जो देखता है ऊपर ही देखता
नीचे से किसी को क्या सरोकार है

त्रस्त है जनता
पस्त है जनता
पुकार गरीब की कौन है सुनता ?

                                                ---राजकांत  क्रांति

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